Lyrics
[verse]
इक चतुर नार थी, बड़ी होशियार थी
पर मन ही मन में कहीं उदास थी
ढूँढती फिरे थी वह अपना साथी
जो समझे उसकी हर एक आस थी
[verse]
सबको हँसाए, सबको लुभाए
पर भीतर ही भीतर तन्हा रहे
कौन जाने उस मन की बातें
जो चुपके-चुपके आँसू बहे
[chorus]
ढूँढती फिरूँ मैं अपना साथी
जो समझे मुझे बिना कहे ही
हर चेहरे में तलाशूँ वह अपनापन
जो सच्चा हो, दिखावा ना हो कहीं
[verse]
बाज़ारों में, महफ़िलों में
भटकती रही यह प्यासी जान
कहीं तो मिलेगा वह सच्चा साथी
जो समझे दिल की हर पहचान
[bridge]
वक़्त लगे या लगे उम्र सारी
पर हार ना मानूँगी मैं कभी
कहीं ना कहीं तो मिल ही जाएगा
वह साथी जो हो मेरे जैसी सभी
[chorus]
ढूँढती फिरूँ मैं अपना साथी
जो समझे मुझे बिना कहे ही
हर चेहरे में तलाशूँ वह अपनापन
जो सच्चा हो, दिखावा ना हो कहीं
[verse]
इक चतुर नार थी, बड़ी होशियार थी
आख़िर मिल गया उसे वह साथी प्यारा
जिसने समझा उसके मन को
और बना दिया जीवन का सहारा