Lyrics
[verse]
रोज़ शाम आती थी, ढल जाती थी
पर वह शाम कुछ ख़ास थी
जब पहली बार मिली थीं नज़रें
और शुरू हुई इक नई आस थी
[verse]
हर रोज़ की तरह वह भी इक दिन था
पर बदल गया था सब कुछ यूँही
कहाँ पता था उस शाम को
यह मुलाक़ात बनेगी ज़िंदगी सही
[chorus]
रोज़ शाम आती थी, अब भी आती है
पर वह ख़ास शाम याद रहेगी सदा
जिसने बदल दी दिशा ज़िंदगी की
वह लम्हा दिल में बसा रहेगा सदा
[verse]
वक़्त गुज़रा, कई शामें ढलीं
पर वह पहली शाम आज भी ताज़ा है
हर याद के साथ मुस्कुरा उठे दिल
जब भी वह लम्हा दिल में बजा है
[bridge]
शायद यही है ज़िंदगी की रीत
कि इक शाम बदल दे सारी कहानी
जो साधारण सा लम्हा लगे
बन जाए वह सबसे बड़ी निशानी
[chorus]
रोज़ शाम आती थी, अब भी आती है
पर वह ख़ास शाम याद रहेगी सदा
जिसने बदल दी दिशा ज़िंदगी की
वह लम्हा दिल में बसा रहेगा सदा
[verse]
रोज़ शाम आती थी, ढल जाती थी
पर उस शाम का शुक्रिया अदा करूँ
जिसने दिया मुझे यह प्यारा साथी
हर शाम अब उसी का नाम जपूँ