Lyrics
[verse]
आ अब लौट चलें नदिया के उस पार
जहां बचपन बीता था वो अपना संसार
मिट्टी की खुशबू अब भी बुलाती है
चल वापस चलें अपने गांव की ओर
[verse]
शहर की चकाचौंध में खो गए हम
भूल गए अपनी जड़ों को कहीं
पर दिल के किसी कोने में अब भी
वो पुरानी गलियां बसी हैं यहीं
[chorus]
आ अब लौट चलें नदिया के किनारे
जहां मां की लोरी अब भी पुकारे
छोड़ आए थे जो अपनापन वहां
आ उसे फिर से अपना बना लें दोबारा
[verse]
पीपल की छांव आम के बाग़
सब याद दिलाते हैं वो सुनहरे दिन
चल फिर से बैठें उसी आंगन में
जहां बीता था बचपन बिन किसी ग़म के
[chorus]
आ अब लौट चलें नदिया के किनारे
जहां मां की लोरी अब भी पुकारे
छोड़ आए थे जो अपनापन वहां
आ उसे फिर से अपना बना लें दोबारा
[bridge]
जो भी कमाया शहरों में हमने
जड़ों के बिना अधूरा ही रहा
चल इस बार ना भूलें अपनापन
गांव की मिट्टी में फिर से बसा रहा