Lyrics
[verse]
कितने बरस बीते परदेस में भटकते
कितनी राहें नापी बिना कोई मंज़िल पाए
अब थक गए हैं पैर, थक गया है मन भी
आ अब लौट चलें वहाँ, जहाँ अपने बुलाए
[verse]
शहरों की चमक ने बहुत कुछ दिखाया
पर अपनों की याद ने हर पल है रुलाया
सोना-चाँदी सब कुछ पाया यहाँ
फिर भी दिल में एक ख़ालीपन है छाया
[chorus]
आ अब लौट चलें, आ अब लौट चलें
वहीं जहाँ से हमने ये सफ़र था शुरू किया
अपनी मिट्टी बुला रही है हमें
वहीं है सुकून, वहीं है जो जिया
[chorus]
आ अब लौट चलें, आ अब लौट चलें
बहुत देख ली दुनिया, बहुत घूम लिए
अब बस अपनों के आँगन में बैठ के
दो पल सुकून के हम भी जी लिए
[verse]
याद आती है वो पुरानी गली
जहाँ बचपन बीता, जहाँ मस्ती पली
आज सब कुछ है फिर भी कुछ है कम
जो अपनों के बिना कभी पूरा नहीं मिला
[bridge]
मालूम है राह लंबी है वापसी की
पर हर कदम पे बढ़ेगी अपनों की खुशी
चलो फिर से बाँधें वो पुराना नाता
जो टूट गया था दूरी की वजह से कभी
[chorus]
आ अब लौट चलें, आ अब लौट चलें
वहीं जहाँ से हमने ये सफ़र था शुरू किया
अपनी मिट्टी बुला रही है हमें
वहीं है सुकून, वहीं है जो जिया
[chorus]
आ अब लौट चलें, आ अब लौट चलें
बहुत देख ली दुनिया, बहुत घूम लिए
अब बस अपनों के आँगन में बैठ के
दो पल सुकून के हम भी जी लिए